Friday, February 4, 2011

मुझ में क्या है

देखो  ज़माने  के  रंग  मैं  क्या  है
भुला  दो  मुझे , मुझ  में क्या  है

उजाला  चाँदनी  रातों  का  देखो
सिवाए  अंधेरों  के  मुझ  मैं  क्या  है

नहीं  मिल  सकती  जिन्हें  कभी  हकीकत
असी  मेरे  ख़्वाबों  में  क्या  है

अरमान  फ़ना  नज़र  वीरान , दिल  जला  है  कुरेदते   हो  मुझे ,
 अब  राख  मैं   क्या  है

ख़ुशी  के  लिया  सब  कुछ  भुला  देते   है
यादों  का  कफ़न  पहने  मैं  क्या  है

तुम्हारी  महफ़िल  मैं  चाँद  सितारे  है
एस  नाकाम  शायराना  मैं  क्या  है 


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